विषय तर्क-युक्तियों द्वारा समझाया है, वहां यदि प्रमाण-प्रयोग की सहायता से किसी की युक्ति के समझाने में 4-5 या उससे अधिक पृष्ठ लगे हो तो उस युक्ति का आरम्भ मात्र पढ़ कर ही उन पृष्ठों की सारी बातें मैं समझ लेता था।’’ (श्री रामकृष्ण लीला प्रसंग, तृतीय खंड, पृष्ठ. 60-61)
अपनी इस असाधारण प्रतिभा से नरेन्द्र ने विवेकानन्द बनने पर जर्मनी के प्रसिद्व वेदान्ती डाॅ. डायसन को कैसे चकित किया, यह हम डाॅ. डायसन से भेंट के समय लिखेंगे।
अध्ययन का उद्देश्य सत्य की खोज था और नरेन्द्र जिसे सत्य समझ लेता था, उसकी जी-जान से रक्षा करता था। जब देखता था कि कोई दूसरा उसके विपरीत भाव या मत व्यक्त कर रहा है तो नरेन्द्र चट विवाद पर उतर आता था और अपने सशक्त तर्कों और युक्तियों द्वारा उसे परास्त करके दम लेता था। पराजित व्यक्ति कई बार बिलबिला उठते थे और नरेन्द्र पर दम्भी होने
देखोगे, ढोल-करताल ही बज रहे हैं। दुन्दुभी-नगाड़े क्या देश में तैयार नहीं होते? तरही-भेरी क्या भारत में नहीं मिलती? वही सब गुरू-गम्भीर ध्वनि लड़कों को सुना। बचपन से जनाने बाजे सुन-सुनकर, कीर्तन सुन-सुनकर, देश स्त्रियों का देश बन गया है। इससे अधिक और क्या अधःपतन होगा, नगाड़े में ब्रह्मरूद्र ताल का दुन्दुभिनाद उठाना होगा। ‘महावीर-, ‘महावीर’, की ध्वनि तथा ‘हर हर बम बम’ शब्द से दिग्दिगन्त कम्पित कर देना होगा....(वि. सा., षष्ठ खंड, पृ. 186)
हनुमान को शिव का अवतार भी कहा जाता है।