उठाना होगा। ‘महावीर-, ‘महावीर’, की ध्वनि तथा ‘हर हर बम बम’ शब्द से दिग्दिगन्त कम्पित कर देना होगा....(वि. सा., षष्ठ खंड, पृ. 186)
हनुमान को शिव का अवतार भी कहा जाता है।
पंच बरस पूरे होने पर नरेन्द्र की शिक्षा कुछ दिन घर पर हुई। इसके बाद उसे मेट्रोपोलिटन इंस्टिट्यूट में भेज दिया गया। वहां नरेन्द्र को बहुत से हमउम्र सहपाठी मिले। नये साथी पाकर उसके आनन्द की सीमा न रही और उसने जल्दी ही अपना एक छोटा-सा दल संगठित कर लिया। उसके ये साथी सुबह-शाम घर पर खेलने आते। ‘दत्त भवन’ का विशाल आंगन उनके कोलाहल से गूंज उठता।
खेल में अगर कोई लड़का किसी प्रकार की धांधली करता तो नरेन्द्र बहुत बिगड़ता और आगे बढ़कर फेसला करता। अगर देखता कि उसकी बात नहीं मानी जा रही और लड़के आपस में मार-पीट पर उतारू हैं तो वह निर्भीक
रहते हुए भी पारिवारिक परम्परा के अनुसार शास्त्र-चर्चा तथा अध्ययन के प्रति उनका विशेष अनुराग था। राजा राममोहन राय के समय से प्राचीनता और आधुनिकता में प्राच्य तथा पाश्चात्य में जो संघर्ष शुरू हुआ था, वह अब तीव्र रूप धारण करके एक निर्णायक स्थिति में पहुंच चुका था।
15 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
राजा राममोहन राय जिस पुरानी शिक्षा पद्वति को बदलना चाहते थे, उसका स्थान अब मैकाॅले की शिक्षा प्रणाली ने ले लिया था। संस्कृत तथा फारसी की शिक्षा गौण हो गई थी और अंगे्रजी का बोलबाला