बाद जब दुर्गाचरण अपनी जन्मभूमि का दर्शन करने आए तो पत्नी का एक साल पहले देहान्त हो चुका था। उन्होंने अपने बालक पुत्र विश्वनाथ को आशीर्वाद दिया और चले गए। इसके बाद उन्होंने अपने बालक पुत्र विश्वनाथ को आर्शीवाद दिया और चले गए। इसके बाद उन्होंने फिर कभी घर में कदम नहीं रखा और न किसी ने उन्हें देखा।

यह विश्वनाथ ही नरेन्द्रनाथ के पिता थे। उन्होंने भी वकालत का पैत्रिक धंधा अपनाया था। लेकिन वकालत में व्यस्त रहते हुए भी पारिवारिक परम्परा के अनुसार शास्त्र-चर्चा तथा अध्ययन के प्रति उनका विशेष अनुराग था। राजा राममोहन राय के समय से प्राचीनता और आधुनिकता में प्राच्य तथा पाश्चात्य में जो संघर्ष शुरू हुआ था, वह अब तीव्र रूप धारण करके एक निर्णायक स्थिति में पहुंच चुका था।

15 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

राजा राममोहन राय जिस पुरानी शिक्षा पद्वति को बदलना चाहते थे, उसका स्थान


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हमारी संस्कृति तथा परम्परा का विकास संभव है; यही सोचकर मैंने विवेकानन्द पर पुस्तक लिखना तय किया। वामपंथी छिछले छोकरों और कुछ संजीदा लोगों ने भी इसका विरोध किया। मैंने इस विरोध को भी तर्क से काट दिया। लेनिन ने कहा है, ‘कम्युनिष्ट तभी नेतृत्व की भूमिका अदा कर सकते हैं, जब वे उसकी सही व्याख्या करें, जिसे लोग पहले से जानते-पहचानते हैं।’’

दरअसल हिंदू धर्म को प्रतिक्रियावादी मान लेने की भ्रांति ही इस विरोध का कारण है। ये तथाकथित माक्र्सवादी यह नहीं समझ पाये


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